अतीत के दुष्कर्म के मानसिक घाव

सबसे पहले तो समझना होगा कि वो जो घटना है दुष्कर्म की, जो शायद दस-बीस साल पहले घटी होगी, आज भी मन पर इतनी छाई हुए क्यों है? मन किसी भी विषय को, स्मृति को, घटना को, क्यों पकड़ता है? इतना कुछ होता है दिन भर, मन उसको तो याद नहीं रखता न? कुछ विशेष घटनाओं को ही मन क्यों छपने देता है अपने ऊपर?

मन वही सब कुछ याद रखता है जो किसी भी तरह से उसे बचे रहने में, उसके आगे बढ़ने में सहयोगी हो। सुख एक तरह की उत्तेजना है, उत्तेजना…

--

--

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org