अगर सच्ची है शांति, तो अशांति में कूदो

जो शांत हो जाते हैं, उनको पुरस्कार ये मिलता है कि उनको अशांतियों के मध्य धकेल दिया जाता है।

भीतर की शांति लगे कि इतनी पुख्ता हो गई है कि अशांति को अब दूर धकेल देती है, तो कूद पड़ो जीवन में, चुनौतियों को स्वीकार करो। भिड़ जाओ माया से।

कमज़ोरों को, बीमारों को, तो ये ही सलाह दी जाती है कि ठण्ड में बाहर मत निकलना। और जो बाकी मर्द होते हैं, वो ठण्ड में भी नंगे सीने के साथ निकल…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org