अंधेरा क्यों लुभाता है?

हम सब तो चैन के दीवाने होते हैं, गुफ़ा में कुछ चैन मिल रहा होगा इसीलिए गुफ़ा में हो। उस चैन की गुणवत्ता क्या है? ये देख लो। गुफ़ा में कोई भी अनायास नहीं होता। आदमी कहीं भी अनायास नहीं होता। हम जहाँ भी होते हैं, जैसे भी होते हैं, किसी कारण से होते हैं। वो कारण होता है- हमारा अपना चयन, हमने चुना होता है, यूँ ही कुछ नहीं होता हमारे साथ। और हम क्यों चुनते हैं? आदमी जब भी चुनता है अपनी दृष्टि में शांति को ही चुनता है, चैन को ही चुनता है। उसका चुनाव गलत…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org